गुरुवार, 20 अगस्त 2026

शुक्र ग्रह

 क्या शुक्र ग्रह ही आदमी को चलाता है ? शुक्र देवताओं का आचार्य कहलाता है । प्रेम , सुन्दरता, कला और काम का प्रतीक इसे ही माना जाता है ।कुण्डली में ये किस भाव में , किस राशि में , किस भाव का स्वामी है ,किस ग्रह से युति और किस किस ग्रह से दृष्टि सम्बन्ध बनाये हुए है , इस से ही आपका चरित्र तय होता है , यानि शुक्र का स्वभाव दूसरे ग्रहों के प्रभाव से तय होता है ।गुरु के प्रभाव से संबंधों में ईमानदार , विवेकपूर्ण निर्णय लेने वाला , नैतिक मूल्यों वाला देवता समान होता है । शनि के साथ प्रभुत्व जमाने वाला , अंदर-अंदर नाराज़गी पालने वाला , रिश्ते निभाने वाला और राहु के साथ कटु बोलने वाला , भ्रम पालने वाला होता है । केतु के साथ विरक्ति भाव वाला हो जाता है ।बुध वाला तार्किक ,सोच समझ के रिश्ते बनाता है ।चंद्र के साथ खूबसूरत संबंध मगर अतिसंवेदनशील ,कल्पना लोक में रहने वाला होता है । सूर्य के साथ तो अग्नि ही भर देता है , गर्म प्रकृति वाला हो जाता है । सबसे ज़्यादा तंग मँगल के साथ करता है , मंगल के साथ ऊर्जा से भरा हुआ , चाहिए तो किसी भी क़ीमत पर चाहिए ।मंगल ग्रह से युति के साथ अगर गुरु या बुध से कोई भी संबंध न हो तो चरित्रहीनता की तरफ़ ले जाता है । शुक्र अगर अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो अपराध तक करवा डालता है ।


अपनी ज़िंदगियों पर ध्यान दें और सच बोलें तो पाएंगे कि ये खिंचाव चुम्बक की तरह हमें चला रहा होता है , हर सुबह की ऊर्जा , साथी से प्रेम यही तो भरता है । शुक्र को प्रेम भी कह सकते हैं, प्रेम ही तो हमारे हर कृत्य की जड़ में है  ,प्रेरणा में है। शक्ल की ख़ूबसूरती , संबंधों की ख़ूबसूरती , हर और कलात्मकता , रचनात्मकता यही तो लाता है। शुक्र अगर अच्छा हो तो आदमी कला जगत में बहुत नाम भी कमाता है । 


शुक्र अगर बिगड़ जाए तो चेहरा निस्तेज , जीवन निस्तेज हो जाता है ।शुक्र साधा तो सब साध लिया । शुक्र तो चुम्बक है।तो क्या हमारी ज़िन्दगी शुक्र के सहारे चल रही है ? अगर लोगों के चेहरे के नक़ाब उतार दिए जाएँ तो कितनी ही दबी-ढकी कहानियाँ उजागर हो जायें यानि वे सारे भी शुक्र के कारनामे हैं ।आदमी चाह कर भी अनदेखी नहीं कर पाता । आदमी तो शुक्राचार्य की कठपुतली हो गया एक ही तरीका है कि शुक्र को अच्छा करने का , इसे प्रेम , विश्वसनीयता , कलात्मकता , रचनात्मकता और ईमानदारी से जोड़ लें ।कोई भी सेंध लगा न सके । 

इसे मर्यादा में रखा जाए , सोच विचार कर अमर्यादित विचार पर ही अंकुश लगाया जाए। हमारी आज , अभी की सोच अगले पल की किस्मत लिखती है , भविष्य लिखती है । तो हमारी कुंडली में लिखे हुए ग्रहों का फल भी बदलना मुमकिन है ।