शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

रिश्ते पनपते हैं या आख़िरी साँसे गिन रहे होते हैं

 सामंजस्य या सुधार के लिए या समझौते के लिए साथ रहने वाले ये अच्छी तरह जान लें  कि रिश्तों में साथ की चाह , पसंद या प्यार जरूरी है तभी आप दूसरे को  बर्दाश्त कर पाते हैं वरना रिश्ता मरने लगता है। अगर आप समझते हैं कि बच्चे के लिए या समाज और परिवार के दबाव के लिए आप रिश्ता बर्दाश्त कर रहे हैं तो ये वक्त और अपनी क़ीमती ज़िन्दगी को बर्बाद करना है। आप जब तक किसी को दिल से क़ुबूल नहीं करते तब तक सहज नार्मल रिश्ते में नहीं रह सकते ।या फिर आप में इतनी कला हो कि आप ख़ुद से विरक्त हो कर भी सब ख़ुशी-ख़ुशी निभा सकते हैं । 


पति-पत्नी का एक अकेला ऐसा रिश्ता है जो कितने ही मनमुटाव हों जिसे बिस्तर पर का सहज साथ पल भर में मिटा देता है ।एक विश्वास हर असहमति पर भारी पड़ता है । औरत जिस दिन वफ़ा का विश्वास खो देती है उसी दिन आदमी उसकी नजर तो क्या उसके दिल से भी उतर जाता है । 


कहते हैं आदमी के दिल का रास्ता उसके पेट से हो कर जाता है  यानि खाने में उसकी पसंद का ख़्याल रखा जाये तो वो खुश रहता है । सबको साथी की पसंद-नापसंद का ख़्याल तो रखना ही चाहिए फिर चाहे वो खाना हो ,पहनना-ओढ़ना हो ,या स्पेस हो । दूसरे का ख्याल रखने के लिए भी तो हम ख़ुद को बदलते ही हैं ; और ये तभी संभव है जब प्रेम की कोई डोर हमारे बीच हो । तभी मुश्किलें भी आसान लगती हैं । कहते हैं कि बाँटा हुआ दुख आधा हो जाता है और बाँटा हुआ सुख दुगना ।


नियम कायदे क़ानून अपने लिए बनाइये दूसरों के लिए नहीं । इतना लचीला रहिए कि दूसरों को उनकी खामियों के साथ स्वीकार कीजिए , यही प्यार है ।


ये परिवार और समाज की व्यवस्था ही आदमी को घर में संतुष्ट रखती है ।अफ़सोस भी है और फ़ख़्र भी कि औरत की समझदारी से ही पति ख़ुश और परिवार जुड़ा रहता है ।जो घर में ख़ुश है उसका व्यक्तित्व खिला हुआ रहता है । बाहरी दुनिया का ग़ुस्सा भी पुरुष निकालता तो घर आ कर ही है , जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए , साथी से परेशानी बाँट लेनी चाहिए । व्यक्तित्व विकास भी तभी संभव है जब आप अपनी ऊर्जा को झमेलों में व्यर्थ न कर के साथी के साथ मिल कर सही दिशा देते हैं।


इस गलतफहमी में मत रहें कि बोझिल रिश्ता एक दिन ठीक हो जायेगा।हो सकता है रिश्ता आख़िरी साँसें ले रहा हो ।अगर प्यार या पसंद या विश्वास का धागा बीच में नहीं है तो एक पौधे की तरह रिश्ता दिन-ब-दिन मरता जाता है। इस पौधे को वही पानी चाहिए तभी ये फल-फूल सकेगा । रिश्ते मरते हैं या पनपते हैं।अगर एक भी कारण है ,रिश्ते को बनाये रखना चाहते हैं तो समय रहते प्रयत्न करिए , रिवाइव करिए , छोटी-छोटी ख़ुशियाँ पैदा कीजिए और सहज सरल स्वीकार भाव रखिए ।कोई अकेला नहीं जी सका है , कुदरत ने जो आपको बख्शा है उसे सम्भालिए ।

मंगलवार, 16 सितंबर 2025

इतना कड़ा फैसला

 सारी रात आँखों के आगे से उन दोनों के चेहरे हटे ही नहीं ।मन ने कितने ही सवाल कर डाले ।क्यों वो इतना हार गई कि ज़िन्दगी ही वार दी ।तीन साल पहले किसी मौक़े पर देखा था ।तब उसका बेटा आठ साल का था ।वो उस खूबसूरत बच्चे की बाँह कस के पकड़ी थी मगर वो इधर-उधर भागने की फिराक में था ।किसी की भी प्लेट से खाना उठा कर खा रहा था ।माँ की ये कोशिश कि वो उसे अपने साथ रखे और कुछ ऐसा-वैसा न हो , इज्जत बची रहे ।मगर क्या स्पेशल बच्चे किसी की भी नजर से छुपते हैं ।नजर और मन वहीं रुक जाते हैं  जहाँ कुछ अलग है ।


जब वो पैदा हुआ तो बोला ही नहीं , जल्दी ही पता लग गया कि वो जन्मजात न बोल पाने और न समझ पाने की अपंगता के साथ इस दुनिया में आया है ।न जाने कलेजे पर कितने पत्थर रखे होंगे ।और फिर सिलसिला शुरू हुआ डॉक्टर्स और धार्मिक स्थलों के चक्कर लगाने का मगर कोई फ़र्क पड़ा ही नहीं ।वो इंजीनियर थी जॉब छोड़नी पड़ी , बच्चे की चौबीस घंटे देखभाल के लिए जरूरी हो गया था।दीन-दुनिया तो उसने भुला ही दी थी ।पिछले दो-चार दिन पहले ही वो पंजाब के किसी डॉक्टर से दवाइयां ले कर लौटे थे।अब वो ग्यारह साल का मगर सोलह साल की शारीरिक गठन वाला हो गया था ।उसे संभालना मुश्किल होता जा रहा था , उसकी सक्रियता काबू में रखने लायक थी ही नहीं ;फिर समाज से भी थोड़ी दूरी बना कर चलना , घर पर ही ट्यूशन पढ़ाने के लिए किसी को रखा हुआ था ।दिल की दिल में ही रही , और फिर उम्मीद की आखिरी किरण भी मुरझा गई ।जब सुबह अँधेरे से शुरू हो कर अँधेरे पर ही ख़त्म होती हो तो शायद इन्सान हार जाता है ।ऐसे ही कमजोर पलों में शायद उसने इतना कठोर फैसला ले लिया , उसने एक नोट छोड़ा कि वो अपनी मर्जी से जा रहे हैं , इसका कोई जिम्मेदार नहीं ।इस तरह उसने अपने पति के लिए मुश्किलें कुछ आसान कर दीं । कितने ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोई हल नहीं था , उनके लिए कोई छाँव न थी ।


कोई नहीं जानता कि कैसी-कैसी मनःस्थिति से गुजरी होगी वो।कितने सपने सँजोता है इंसान , जॉब ,शादी ,बच्चा और ये हश्र …..आँखों के आगे बस एक रील की तरह गुज़र जाता है ।माँ थी वो ; चौबीस घंटे जिसे नज़रों के सामने रखती थी ,उसके लिए दुनिया से लड़ सकती थी मगर अपने ही अंतर्मन में चलते युद्ध से हार गई।वर्तमान तो दुखद था ही भविष्य भी अंधकार-मय था।न जाने मन कितना छलनी था।


जन्मजात स्पेशल बच्चे या यूँ कहो कि जेनेटिक बीमारियों के साथ पैदा हुए बच्चे का पूरी तरह ठीक होना लगभग नामुमकिन ही होता है।इस सच को स्वीकार करना भी उसके अपनों के लिए बहुत मुश्किल होता है।मन लगातार लड़ता है ,उम्मीद करना चाहता है चमत्कार की भी।क्यों न माँ-बाप इसको इस तरह मान लें कि इस बच्चे को कहीं तो पैदा होना था , ये भगवान का बच्चा है और हमें ये अवसर मिला है कि हम उसकी देखभाल करें और उसकी राह आसान ,सुरक्षित और आरामदायक बनायें ।हम ख़ुद को सौभाग्यशाली समझें कि ईश्वर के काम में योगदान दे रहे हैं या फिर ये सोचें कि बच्चा भाग्यशाली है कि उसे आप जैसे पेरेंट्स मिले हैं ।ज़िंदगी तो वैसे भी होम होनी ही होती है , किसी की भी ज़िंदगी आसानियों से भरी नहीं होती ।ये सोच रखना आसान तो नहीं है मगर यही रास्ता वस्तुस्थिति से डिटैचमेंट का भी है और ख़ुद को एक महान उद्देश्य दे कर जी लेने का भी ,साथ ही वास्त्विकता को स्वीकार भाव देने का भी।मगर ये समझ खुलती सिर्फ़ आध्यात्मिकता के पथ पर है।इसके साथ ही ये भी जान लेना चाहिए कि वो आपकी ज़िम्मेदारी ज़रूर है मगर आपको ख़ुद पर भी वक्त देना है अपना अन्तर्मन मजबूत बनाना है , दुनिया वहीं तक सिमट नहीं जानी चाहिए।और मजबूत मन ही तो बच्चे को सही देखभाल दे सकेगा , वरना ख़ुद को भी संभालना मुश्किल हो जाएगा ।समाज को भी इसे स्वीकार करने की जरूरत है ।सहानुभूतिपूर्ण रवैया रखने की जरूरत है । कोई नहीं जानता कौन किस परिस्थिति में जी रहा है और कितना उदास है ; हम सबको जागरूक रहना चाहिए ।हमारा थोड़ा सा आगे बढ़ाया हुआ हाथ उसका बहुत बड़ा सम्बल हो सकता है।

रविवार, 14 सितंबर 2025

रोया होगा पहला कवि

 ये तय है कि कवि मन एक दिन तो जरूर रोया होगा , तभी जा कर संवेदन-शील मन ने कुछ पंक्तियाँ रची होंगी । कवि हृदय शापित हृदय ही तो होता है , पिघलते हुए अहसास जब लाइलाज हो जाते हैं तो लावे की तरह बह निकलते हैं ।ये अंगारे हमारे ढाँचे को ध्वस्त भी कर सकते थे ; मगर अचानक ये क्या होता है कि सारा लावा गीत नज़्मों में ढलने लगता है ।शापित हृदय हो कर भी कवि अपने उद्गारों को दिशा देता है , साथ ही अपने जीवन को एक उद्देश्य दे लेता है ।जो न जाने कितनी मौतें मर कर जिया हो वो मिलन , श्रृंगार , बहार , ख़ुशी के रंगों की अनुभूतियों की अभिव्यक्ति भी उतनी ही संजीदगी से कर सकता है ।

रोया होगा पहला कवि भी 

आह से निकला होगा गान 


क्रंदन मन की गाथा है 

अपने-अपने हिस्से आई , थोड़ी कम कुछ ज़्यादा है 


लरजते लफ्ज़ों ने पकड़ी होगी जब स्याही 

भँवर समेटे दिल ने तब 

तिनके का ही सहारा ले कर 

उँड़ेली होगी अपनी व्यथा


पीड़ा भी सार्थक होती 

जन-जन का मन झंकृत होता 

उपजे गर जो मधुर मनोहर गान 







सोमवार, 28 जुलाई 2025

रावी पार जाने वाली बेटियाँ

 हीरें भी कैसे-कैसे भरम पाल लिया करती हैं कि उनका महबूब राँझा ही होगा ।आदमी मुहब्बतें भी वक्ती जरूरतों की तरह तय करता है और जरूरतें तो वक्त के साथ बदल जाया करती हैं ।हीर कहती मेरी वफ़ा तो मर कर तय होती , उसकी बेवफ़ाई ने रोज मर-मर के जीने के लिए छोड़ दिया ।ऐ ज़िन्दगी, तुम भी सहरा से शुरू कर के सहरा पर ही ले आती हो ।

ये कौन कदमों के नीचे अंगारे रख जाया करता है वरना चलना तो सब फूलों पर ही चाहते हैं । सात जन्मों तक साथ चलने की बातें करते थे , कहाँ तो एक जनम भी दिल से साथ तय न था ।वो कोई और ही जमीं होती होगी , कोई और ही वतन होता होगा । ज़न्नत ज़रूर इसी धरती पर उतर आती बस उसकी आँखों में नमी नहीं थी ।

वे ज़िंद-जाँ वार दित्ती, तूँ समझेआ ना 

किस थाँ जाँवा, मेरे लई ते हुण वा कोई ना 


रावी पार जाण वालियाँ धीयाँ 

निक्खड़ियाँ मापेयाँ तों 

अम्बरा ने बाँ ना फड़ी

तलियाँ थल्ले थाँ कोई ना 


राँझे मुक्क गये दुनिया तों 

हीराँ दी क़िस्मत माड़ी 

बदनाम होया ऐ वी रिश्ता 

प्रीत निगोड़ी दा नाँ कोई ना 


वे ज़िन्द-जाँ वार दित्ती, तूँ मुड़या ना 

मेरे वेड़े धुप्प ही धुप्प ,तेरे नेड़े छाँ कोई ना 


इसी गीत का हिंदी अनुवाद ….


दिलों-जाँ वार दी , तू समझा ही नहीं 

किधर जाऊँ , मेरा तो कोई हाल ही नहीं 


रावी पार जाने वाली बेटियाँ 

बिछुड़ीं माँ-बाप से 

आसमाँ ने बाँह न थामी 

तलुवों नीचे जमीं ही नहीं 


राँझें ख़त्म हुए दुनिया से 

हीरों की क़िस्मत है बुरी 

बदनाम हुआ ये रिश्ता भी 

प्रीत निगोड़ी का नाम ही नहीं 


दिलों-जाँ वार दी , तू समझा ही नहीं 

मेरे अँगना धूप ही धूप , तेरे अँगना छाँव ही नहीं 



रविवार, 1 जून 2025

प्यार नाम की चिड़िया

 क्या है प्यार ? आज का युवा ढूँढ रहा है सच्चा प्यार , जो मिल के नहीं मिलता ।बाहरी अट्रैक्शन , क्वालिफिकेशन या रहन-सहन जब आकर्षित करते हैं तो इसे प्यार समझ लिया जाता है ।अपरिपक्व उम्र में परिपक्व प्यार कैसे होगा ! थोड़ी सी मुलाकातों के बाद ही पोल खुलने लगती है । हर किसी की ईगो , सुपीरियारिटी काम्प्लेक्स , उम्मीदें और रिजिडिटी व्यवहार में नजर आने लगती है और फिर प्यार नाम की चिड़िया फुर्र हो जाती है ।अब एक-दूसरे को बर्दाश्त करना तक मुश्किल हो जाता है ।

जबकि ये सच्चाई है कि दो अलग-अलग परिवेश से आए हुए लोग ,अलग-अलग व्यक्तित्व समान हो ही नहीं सकते ।प्यार तो नाम ही ख़ुशी-ख़ुशी बर्दाश्त करने को कहते हैं ।सुधारना भी है तो प्यार से अपनी बात समझायें ।जैसे पेरेंट्स अपने बच्चों को समझाते हैं मगर प्यार कहीं कम नहीं होता ।प्यार का मतलब ही उसका भला चाहना है ।इसीलिए प्यार को वन वे ट्रैफिक कहा जाता है । ये भी कहा जाता है कि आप शादी उस से करो जो तुम्हें चाहता है ; उस से नहीं जिसे सिर्फ तुम चाहते हो और वो नहीं ।इसलिए कि उसके दिल में एक नाजुक कोना तुम्हारे नाम का हमेशा रहेगा ।उसके पास एक कारण हमेशा रहेगा रिश्ता बनाये रखने का ।ये भी कहते हैं कि किसी अनजान आदमी से शादी करने से अच्छा है किसी दोस्त से शादी कर लो , वो तुम्हे अच्छे से जानता होगा ।

प्यार है तो भावनाओं का वेग ही , इसे दिशा दी जा सकती है ।आपका भाव आपकी आँखों से टपकता है ।किसी में भी सुर्खाब के पर नहीं लगे होते । इसलिए ख़ुद को भी इतना भाव न दें कि दूसरे की ज़िन्दगी के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएँ ।जो व्यवहार आप साथी से अपने लिए चाहते हैं , वही आप उसके साथ करें ।

बुधवार, 7 फ़रवरी 2024

हैकर्स से सावधान रहिए

आजकल स्कैम के नये-नये ढंग प्रचलित हो गए हैं ।बाज़ार तो आपको ठगने के लिये पहले ही बैठा था ; वो क्या कम था जो अब ऑनलाइन स्कैम करते हुए ठगी शुरू हो गई ।ख़रीद-फ़रोख़्त ,ए.टी.एम., नक़ली बैंक कॉल्स और अब पहचान छिपा कर आपके इमोशंस के साथ खिलवाड़ करते हुए ब्लैकमेलिंग ।

टेक्निकल जानकारी के अभाव में या कहिए कि अगर आप अतिरिक्त सावधान नहीं रहते तो ये ठग या शिकारी आपको निशाना बना सकते हैं ।ये तो ढूँढ ही रहे होते हैं कि कौन कमजोर टारगेट किया जाये ।बड़ी चतुराई से से नये-नये तरीक़े निकालते हैं जैसे कहेंगे कि आपकी बिजली का बिल जमा नहीं हुआ है , अमुक तारीख़ तक आपकी बिजली कट जाएगी , जल्दी पैसे भरिए , आप अगर कहेंगे हमने भर दिया था तो ये कहेंगे कि अपडेट नहीं हुआ बिल ।आप अपने फ़ोन पर चेक करने जाएँगे , आपका अकाउंट खुलते ही उनके सामने आपके सारे डीटेल्स खुल जाते हैं , वो फ़ौरन आपका सारा जमा पैसा विद्ड्रा करने की कोशिश करते हैं ।कभी तो घबरा कर आप ख़ुद  ही उनके नम्बर पर पैसे भेज देते हैं ।यहाँ तक कि ये ठग आपके किसी रिश्तेदार की आवाज़ में आपसे बात करके किसी की बीमारी या कोई और किसी भी तरह की मजबूरी बता कर पैसे जमा कराने को कहेंगे ।आजकल वॉइस क्लोनिंग भी होने लगी है । इसलिए कभी भी किसी अपरिचित संदेश या नंबर से आई कॉल पर एकदम से यक़ीन न करें ।सिक्के का दूसरा पहलू भी देखें । 

पिछले दिनों तो एक पढ़ी-लिखी लड़की को इक्कीस दिनों तक डिजिटली लॉक रखने का मामला प्रकाश में आया था । आपके नाम से कोई इल्लीगल पैकेट पकड़ा गया है , डराते-धमकाते हैं कि पैसे भरिए ।आपके किसी रिश्तेदार की पिटाई या पुलिस केस की बात करेंगे ।यहाँ तक कि पुलिस का सेट अप भी बना कर रखते हैं ।पूरी तैयारियाँ की होती हैं इन लोगों ने अपने इस इल्लीगल धन्धे के लिए ।

कितनी ही नक़ली साइट्स कुक्कुरमुत्तों की तरह  उग आईं हैं ।इनमें शॉपिंग वाली साइट्स भी हैं और प्रचलित साइट्स के लिए कस्टमर केयर वाली साइट्स भी हैं ।पासपोर्ट लॉगिन के लिए भी नक़ली साइट्स हैं । आप अगर नक़ली साइट्स पर पहुँच जाते हैं तो ये आपका पैसा रिफ़ंड कराने के नाम पर आपका अकाउण्ट नंबर जानने की कोशिश करेंगे ।समय रहते सावधान हो जाइए ।

हैकर्स नक़ली पहचान , नक़ली चेहरे और नाम के साथ ग्रुप्स जॉइन करते हैं । फिर आपको दोस्ती की रिक्वेस्ट भेजते हैं ।आपके बारे में बात करके आपकी कमजोर नस जानने की कोशिश करते हैं । फिर फ़ोन नंबर शेयर करते हैं ।कॉन्फ़िडेंस में लेते हैं और एक दिन खेल खेल जाते हैं ।अभी कुछ सालों से ये लोग सेक्स स्कैम कर रहे हैं ।आपके दोस्त बन कर वाट्स एप पर वीडियो रिकॉर्ड करेंगे ।ये वीडियो किसी लेवल का भी हो सकता है यानि जितना आप इमोशनल फूल बने या जितना आप उसके झाँसे में आये । वीडियो कॉल के दूसरी तरफ़ एक दिमाग़ नहीं , कम से कम दो से चार की संख्या तक मेल , फ़ीमेल्स हो सकते हैं ।इनका अगला कदम होता है वीडियो को वायरल करने की धमकी देते हुए आपका बैंक बैलेंस ख़ाली करना ।इनके पास नक़ली इंस्पेक्टर भी होंगे । यहाँ जो डर गया वो मर गया ।क्योंकि आप सामाजिक डर से न तो इनकी शिकायत दर्ज करवा पाते हैं और न ही कोई और एक्शन ले पाते हैं । ऊपर से ये लोग हैं ही फर्जी नाम , पते , नम्बर और चेहरे के साथ ।कमजोर मन और कमजोर चरित्र का युवा या सीनियर कोई भी इनका शिकार हो सकता है ।ये सनक तो बहुत महँगी पड़ सकती है ।सारी युवा पीढ़ी फ़ेसबुक छोड़ चुकी है ; इनस्टा , थ्रेड वग़ैरह दूसरे ऐप्स पर जा रही है ।क्योंकि इस पर अब अधेड़ शौक़ फ़रमा रहे हैं ।इसलिए सोच समझ कर और पारखी नज़र रखते हुए दोस्त बनाइए ।किसी भी अपरिचित को अपनी लिस्ट में शामिल मत करिए भले ही आपकी हॉबीज़ मिलती हों ।

शालीनता के साथ ज़िन्दगी जियें ।जिस बात पर किसी से भी नज़र चुरानी पड़े उसे कर के क्या फ़ायदा ।कहते हैं भगवान हर जगह मौजूद है ; आज गूगल बाबा हर जगह देख रहा है , आप क्या साइट्स देख रहे हैं , इसे बखूबी मालूम है । जरा सोचिए ,क्यों आपके सामने वैसे ही वीडियोज़ या रील्स प्रस्तुत होने लगते हैं जैसे लिंक्स आप एक बार खोल लेते हैं ।ये मत समझिए कि आप अपनी सर्च हिस्ट्री डिलीट कर लेते हैं तो अब किसी को पता नहीं चलेगा ।आपका हर एक्ट कहीं मैमोरी में रेकॉर्ड हो रहा है ; इसलिए आप लाख चाहें इसकी नज़र से बच नहीं सकते ।

हैकर्स से बचने के लिए कहीं भी अपने बैंक एकाउंट्स की जानकारी शेयर मत कीजिए , OTP मत बताइए , सर्वसुलभ मत होइए ।दूसरों को दोष देने से पहले ख़ुद को सुरक्षित साइड रखिए ।हैकर्स द्वारा टेक्नोलॉजी का ये इस्तेमाल तो विध्वसंक है ।ग़लत तरीक़ा ग़लत ही होता है । बकरे की अम्मा कब तक खैर मनायेगी ।

रविवार, 13 नवंबर 2022

सासों या ससुराल पक्ष के लिये

 बहू और सास-ससुर या ससुराल पक्ष के बीच ख़ट-पट अक्सर सुनते आये हैं ।पहले वक्त और था जब बहुएँ काम-काजी नहीं थीं ;आज वो पति के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर चल रही हैं । आप उन्हें चूल्हे-चक्की यानि गृहस्थी तक सीमित नहीं कर सकते ।वक़्त बहुत बदल चुका है , आज के बच्चों को एक दूसरे को समझने के लिये , साथ वक़्त बिताने के लिये प्राईवेसी भी चाहिये ।आप खाम-खाँ बीच में टाँग अड़ाये हुए हैं ।

बहू को बेटी ही समझें ।जो उम्मीदें आप बेटी के ससुराल वालों से रखते हैं , खुद भी इन पर पूरा उतरें । धीरे-धीरे नये रिश्ते भी सहज होने लगते हैं ।उम्मीद बिल्कुल न रखें , सिर्फ़ अपने कर्तव्य याद रखें । अपने आचरण से आपने क्या कमाया ? क्या ये परिवार रूपी धन आपके पास है ? यानि जब कभी आप तकलीफ़ में हों , आपके बच्चे आपके पास दौड़े चले आएँ , तब तो समझें कि आपने संस्कार कमाये ।कभी बच्चे दूर चले भी जाएँ तब भी आपके दिये हुए संस्कार उन्हें कभी न कभी वापिस आपके पास ले ही आयेंगे ।

जो बेटियाँ अपने माँ-बाप को भाभी के विरुद्ध भरे रखतीं हैं , उनसे भी मैं ये कहूँगी उन्हें अपने भाई से प्यार है ही नहीं ।अगर होता तो वो हर क़ीमत पर उसका घर बनाये रखने की हर संभव कोशिश करतीं ।अलग कल्चर से आई लड़की आपको भी अजनबी लगेगी और उसके लिये तो पूरा वातावरण ही अजनबी है ।प्यार और सत्कार से वक़्त के साथ सब सहज होने लगता है ।

 दहेज जैसी बात तो आज शोभा ही नहीं देती ।अगर अभी भी आप वहीं अटके हैं तो आप पुराना रेकोर्ड हो गये हैं । अब ग्रामोफ़ोन ही नहीं बजते तो रेकोर्ड किस गिनती में ।अब बेटियाँ बेटों से कम नहीं हैं ; कमाने में भी और आपका घर , आपकी पीढ़ियों को सुसंस्कृत बनाने में भी ।

अहं की लड़ाई को पीछे छोड़ दीजिये।टकरा कर आप खुद तो ख़त्म होंगे ही , परिवार की सुख-शान्ति भी ख़त्म हो जायेगी ।अगर आप अपने बेटे को प्यार करते हैं तो निस्संदेह उसके शुभचिन्तक भी होंगे : फिर आप खुद ही उसकी ख़ुशी को ग्रहण कैसे लगा सकते हैं ! बेटे की हर ख़ुशी , सुख-चैन बहू के साथ है ; आप को हर सम्भव कोशिश करनी चाहिये कि उनके बीच केमिस्ट्री बनी रहे ।तभी आप समझदार कहे जाएँगे ।

जरा सोचिए , ये वही लड़की है जिसे आप बैण्ड-बाजे के साथ झूमते हुए ब्याहने गए थे ।जिसकी माँ ने सोचा था जैसे विष्णु भगवान उसकी बेटी लक्ष्मी को लेने उसके द्वार पर आये हैं ।कहीं कोई सहमा हुआ सा डर भी किसी कोने में बैठा हुआ था , फिर भी वो उसे दर-किनार कर उस अनजान लड़के का , उसके परिवार का दिल से अभिनंदन करती है ।तो क्या आप इस लायक़ नहीं थे ? क्यों कड़वाहट के बीज बो रहे हैं ? वक़्त सिर्फ़ उसका है जो उसे अपना मान कर , अपना बना कर चलता है ।जो वक़्त चला जाता है , लौट कर कभी नहीं आता ।इसलिए वक़्त को यादगार बनाइये । आपकी दी हुई ख़ुशी बरसों बाद भी लौट कर आप तक जरुर आयेगी ।